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पिछले काफी समय से लव-जिहाद और रेप-जिहाद सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बने हुए हैं। मुख्य मीडिया इनको हमेशा नकारता आया है, पर ये एक ऐसी कड़वी सच्चाई बन चुकी है जिन्हे स्वीकार ना करना आत्मघाती है। किसी समस्या के अस्तित्व को स्वीकार करके ही उसके निदान के लिए प्रयत्न किए जा सकते हैं। वैसे भी ये विषय महिलाओं से जुड़े हुए हैं अतः इनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। खासकर इसलिए कि महिलाएं परिवार की वो धुरी होती हैं जो पूरे परिवार को एक सूत्र में पिरोकर रखती हैं। विशेषकर हिन्दु धर्म में महिलाओं को परिवार का सम्मान माना गया है। इसलिए ये गंभीर विषय है क्योंकि महिलाओं पर हुए किसी भी अत्याचार का असर पूरे परिवार पर पड़ता है। आखिर जिहाद के ये कौन से रूप हैं जिनका निशाना सिर्फ महिलाएं हैं? ये दोनों शब्द स्वयं अपनी परिभाषा देते हैं। लव-जिहाद का अर्थ किसी महिला को प्रेमजाल में फंसाकर उससे शादी करके उसका धर्म परिवर्तन कराना है। रेप-जिहाद का अर्थ किसी लड़की महिला का बलात्कार करना है। ये एक सर्वविदित सत्य है कि मुस्लिम समुदाय के लोग ही इन घृणित कृत्यों में संलिप्त हैं। हालांकि गैर मुस्लिम विशेषकर हिन्दू महिलाओं के विरूद्ध ये घिनौने अपराध काफी समय से चल रहे हैं, पर पिछले कुछ वर्षों से समाज में लोग इन पर खुलकर चर्चा कर रहे हैं। इतिहास पर दृष्टि डाल कर देखें तो भारत पर मुस्लिमों के पहले आक्रमण के साथ ही हिन्दु महिलाओं पर अत्याचारों के प्रमाण ढ़ेरों मिलते हैं। हजारों-लाखों हिन्दु महिलाओं के बलात्कार हुए, उन्हें इनाम के तौर पर बांटा गया, और ना जाने कितनी ही महिलाओं को बंदी बनाकर अरब ले जाया गया।

भारत पर अंग्रेजों के राज के दौरान भी स्वतंत्रता तक भारत में हिन्दु-मुस्लिमों के बीच कई संघर्ष हुए और हिन्दु महिलाएं अत्याचारों का शिकार हुईं। 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद भी ये क्रम आज तक जारी है। वास्तव में अन्य धर्मावलंबियों को पापी मानकर, उनको छल-बल से मिटाकर, पूरी दुनिया का कैसे भी इस्लामीकरण करने की गंदी जिहादी विचारधारा इस सबका आधार है। लव-जिहाद के तहत हिन्दु महिलाओं को प्रेम जाल में फंसाकर, उनका धर्म परिवर्तन करा कर शादी कर ली जाती है। फिर हिन्दूओं महिलाओं के संपत्ति में अधिकार के लिए बने कानून का दुरूपयोग कर, उन पर दबाव डाल कर, उनका ब्रेन वॉश कर, पैतृक संपत्ति में भी हिस्सा लिया जाता है। वहीं रेप-जिहाद में मौका पाकर हिन्दु महिलाओं का बलात्कार किया जाता हैं। रेप की शिकार अधिकतर महिलाएं असहनीय मानसिक पीड़ा का शिकार होकर सामाजिक जीवन से दूर हो जाती हैं। दोनों ही प्रकार के अपराधों में पूरे परिवार पर ऐसी घटनाओं का गंभीर असर पड़ता है। मुस्लिम दोनों ही स्थितियों में फायदे में रहते हैं। एक तो धर्म परिवर्तन कराकर हिन्दुओं की जनसंख्या कम करके मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ाने का मकसद पूरा होता है। दूसरा, हिन्दुओं के मन में ऐसी घटनाओं से भय फैलता है। काफिर यानी गैर मुस्लिम पर अत्याचार करना गुनाह तो वो मानते ही नहीं हैं। बल्कि किसी भी किस्म जिहाद उन्हे मौत के बाद के काल्पनिक अच्छे जीवन की गारंटी देता है, ऐसा वो मानते हैं। लव एवं रेप जिहाद की ये घटनाएं सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में चल रही हैं। अमेरिका, यूरापीय देशों सहित सभी गैर मुस्लिम देश भी इसके शिकार हैं। स्थानीय एवं शरणार्थियों के रूप में पहुंच रहे मुस्लिम, उन देशों की स्थानीय गैर मुस्लिम महिलाओं को निशाना बना रहे हैं। ब्रिटेन के रोथेरम मे हुए नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण के कांड, जर्मनी में एक अफगान शरणार्थी द्वारा एक उच्च यूरापीय यूनियन की बेटी के बलात्कार के बाद हत्या आदि कुछ ऐसी घटनाएं हैं जिनसे विश्व समुदाय विचलित हो गया था। स्वीडन को वर्तमान में यूरोप की रेप कैपिटल कहा जाने लगा है। ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंगों ने आतंक मचा रखा है।

एक खबर के अनुसार भारत में अकेले केरल में ही 6000 से ज्यादा लोंगों का धर्म परिवर्तन हुआ है जिनमें अधिकतर महिलाएं हैं। अभी उत्तर प्रदेश के जौनपुर से एक बैंक महिला अधिकारी का धर्म परिवर्तन करा कर बलात्कार करने का मामला गर्म है। सिर्फ गूगल सर्च करने पर ही ऐसी सैंकड़ों घटनाओं के समाचार मिल जाते हैं। मुस्लिम युवकों द्वारा हिन्दु महिलाओं से छेड़छाड़ की घटनाएं जब तब सामने आती रहती हैं। महिलाओं के साथ सामूहिक छेड़छाड़ को ये तहर्रूश गेमिया कहते हैं जो कि अरब देशों में खेला जाने वाला एक खेल है। उत्तर प्रदेश के रामपुर में मुस्लिम लड़को द्वारा दिन दहाड़े दो हिन्दु लड़कियों से शारीरिक छेड़छाड़ कर वीडियो बनाना इसी का एक नमूना था। पर दुखद है कि ऐसी जघन्य घटनाओं पर भी राजनीतिज्ञ दोषियों का बचाव करते नजर आते हैं। तुष्टीकरण की राजनीति के कारण कई दल तो लव और रेप जिहाद को पूरी तरह नकार कर इन्हे केवल हिन्दु और दक्षिणपंथी संगठनों का गढ़ा हुआ झूठ करार देते हैं। कई कलाकर फिल्मों और सीरियलों के माध्यम से
लव स्टोरी के नाम पर लव-जिहाद फैला रहे हैं। तो कई लेखक ऐसी पुस्तकें लिख रहे हैं जिनमें हिन्दु लड़की और मुस्लिम लड़कों की प्रेम कहानी है।
खासकर कुछ समय से बॉलीवुड की फिल्में आतंकियों को महिमा मंडित करके हिन्दुओं को गलत बता रही है। पत्रकारों और मीडिया का एक विशेष वर्ग भी इन घटनाओं को महज सामान्य घटनाओं के रूप में प्रस्तुत करता है। ये लोग खासकर लव-जिहाद के प्रकरणों में बालिग होने पर मर्जी से शादी करने के कानूनी अधिकार का हवाला देते हैं। कानून की इन्हीं कुछ खामियों का फायदा मुस्लिम उठाते हैं। भारत में महिलाओं के लिए शादी की उम्र 18 साल है। इसलिये ज्यादातर इसी आयु वर्ग की स्कूल-कॉलेज की छात्राएं और कामकाजी महिलाएं जिहादियों के निशाने पर रहती हैं। जिन महलाओं के पति बाहर रहते हैं या जो परिवार से कम संपर्क में अकेली रहती हैं, वो भी जिहादियों का शिकार हो जाती हैं। मोबाइल और इंटरनेट के कारण स्थिति और भयावह हो गई है।

जिहादी युवक, युवती के धर्म के अनुसार गलत नामों से अपना परिचय देकर, अपनी असली पहचान छुपाकर, युवतियों को प्रेमजाल में फंसा लेते हैं। बाद में ये युवतियों को झांसे में लेकर, धर्म परिवर्तन करा कर या तो शादी करते हैं या बलात्कार। ऐसे बहुत से मामले सामने आए हैं। ऐसा नहीं है कि समझदार
युवक-युवतियों ने आपसी सहमति से अंतर धार्मिक शादी ना की हो, पर उनकी संख्या बहुत कम है और उनका हवाला देकर इन योजनाबद्ध संगठित
अपराधों का बचाव नहीं किया जा सकता। खासकर तब, जबकि रेप जिहाद में 5 साल की बच्ची से लेकर 70 साल की बूढ़ी औरतें तक इन अमानवीय और
पाशविक अत्याचारों का शिकार हो रही हों।

सत्ता हथियाने की होड़ में राजनीतिक दलों द्वारा ऐसी घटनाओं की अनदेखी और तुष्टीकरण की नीति समाज में अराजक स्थितियों और हिन्दु-मुस्लिमों के बीच आपसी वैमनस्य को बढ़ाती जा रही हैं। इसी कारण कई बार छेड़छाड़ की घटनाओं के कारण हिंसक दंगे भी हो जाते हैं। हिन्दुओं को भी सिर्फ राजनीतिक दलों पर निर्भर न रह कर स्वयं ही अपनी महिलाओं की रक्षा के लिये कड़े कदम उठाने होंगे। बच्चों से संवाद बढ़ाना और वर्तमान समय में चल रही घटनाओं का उनको पूरा ज्ञान देना आवश्यक है। हिन्दु धर्म का ज्ञान, अरब से लेकर अंग्रेजी राज तक भारत और हिन्दुओं की दुर्दशा, राजनीतिक समझ और कानूनी पेचीदगियों का ज्ञान हर हिन्दु माता-पिता को अपने बच्चों को जरूर देना चाहिए। हिन्दुओं के सामाजिक संगठन जैसे ब्राहमण सभा, कायस्थ सभा इत्यादि इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मोबाईल, सोशल मीडिया पर सावधानी, अजनबियों से सतर्कता, आत्मरक्षा के तरीके सभी हिन्दु महिलाओं को सीखना चाहिए। हिन्दुओं को एकजुट होकर सरकार और राजनीतिक दलों पर दबाव बनाना चाहिए कि महिलाओं के लिए शादी की उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल कर दी जाए। और गैर हिन्दू से शादी करने की स्थिति में हिन्दू महिला को पारिवारिक संपत्ति में अधिकार ना मिले। ये खासकर इसलिए जरूरी है क्योंकि मुस्लिम समुदाय में महिलाओं को संपत्ति में पर्याप्त अधिकर नहीं मिलते। लव-जिहादी हिन्दु महिलाओं को फंसाकर, उनकी संपत्ति अपने नाम कराकर, उन्हे तीन तलाक दे देते हैं। फिर वो हलाला जैसे अत्याचारों का शिकार होती फिरती हैं। धर्म परिवर्तन कर चुके होने के कारण उन्हे कहीं न्याय नहीं मिल पाता।

हिन्दुओं को भारत में समान नागरिक संहिता की भी मांग पूरी द्रढ़ता से करनी होगी। यदि समय रहते हिन्दुओं ने अपने हितों की रक्षा के लिए कदम नहीं उठाये तो कोई उनकी सहयता नहीं कर पाएगा। हिन्दुओं को जातिवाद को धीरे-धीरे खत्म करके सामाजिक समरसता और जुड़ाव बढ़ाना होगा।

हिन्दुओं की एकता धरातल पर नजर आनी चाहिए। क्योंकि वर्तमान राजनीति ऐसी हो चुकी है कि भीड़ की गलत मांगें भी मान ली जाती हैं और अकेले की सही बात पर कोई ध्यान भी नहीं देता। भगवान भी उसी की सहायता करता है जो स्वयं अपनी सहायता करते हैं।

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